श्री जयराम ब्रह्मचर्य आश्रम ट्रस्ट, नई दिल्ली में यात्रियों के आवास हेतु आधुनिक सुविधाओं से युक्त कमरे उपलब्ध हैं।

देवभाषा संस्कृत के संरक्षणार्थ संस्कृत महाविद्यालय का संचालन

कुरूक्षेत्र आदिकाल से ही अध्यात्मवाद एवं भारतीय संस्कृति का प्रेरणा स्त्रोत रहा है। वैदिक संस्कृति का यह केन्द्र हजारों वर्षो से उज्जवल नक्षत्र धुव की भांति विश्व के धार्मिक-सांस्कृतिक आकाश को प्रकाशित करता आ रहा है। कुरूक्षेत्र घाम को ब्रहमवर्त या ब्रहमा की उत्तवेदी कहा जाता है। यहीं सरस्वती नदी के किनारे मन्त्रवेत्ता ऋषियों ने वेदमन्त्रों की व्याख्याए की थी। महर्षि वेदव्यास ने यहीं पुरासण की रचनाएं कीं, यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से माध्यम से विश्व को गीताज्ञान देकर कर्म और योग का महत्व समझाते हुए जीने की कला सिखयी।

विश्व का विशाल महानतम धर्मयुद्ध महाभारत, तथा अन्य अनेक युद्ध इसी भूमी पर लड़े गये । श्रीमद्भागवत श्रीमद्भागवत् गीता, महाभारत जैसे संस्कृति के रक्षक अमूल्य महान ग्रन्थों का सृजन यहीं पर हुआ। यहीं सूर्च ग्रहण में ब्रहमसरोवर तथा सिन्निहित तीर्थ में स्थान कर लाखों लोग पाप मुक्त होते है। गुरू परम्परा से सूर्चग्रहण मेलों पर यात्रीसेवा के लिए श्री जयराम अन्नक्षेत्र, ऋषिकेश का कैम्प तथा भण्डारा लगता रहता हैं।

क्योकि यह धर्मभूमि, देवभूमि, युग-युगों से विश्व चेतना का केन्द्र रही है इसीलिएउ महाराज श्री देवेन्द्र स्वरूप ब्रहमचारी जी ने कुरूक्षेत्र में भारतीय संस्कृति, संस्कृत तथा वेदों के प्रचार-प्रसार के लिए श्री जयराम विद्यापीठ की स्थापना का संकल्प सन्‌ 1972 में भूमि खरीद कर साकार किया। तत्पश्चात 20 नवम्बर, 1974 को वैदकि रीति से विधिवत्‌भूमिपूजनकर योजनावद्ध कार्यारम्भ किया गया। कुशल वास्तुविद् श्री उप्पल घोष (दिल्ली) द्वारा मानचित्र बनवाये गये। तदनुसार पांच मन्दिरों से युक्त विशाल वेद भवन, वृहद यज्ञशाला आधुनिक सुविधाओं से युक्त दो यात्री निवास (100 कमरे), गीता-रामायण पाठशाला भवन तथा अद्भूत स्फटिकमणि निर्मित शिव मन्दिर का निर्माण करवाया गया।

महाराज जी के एकमात्र उत्तराधिकारी शिष्य व श्री जयराम संस्थाओं के मन्त्री, श्री ब्रहमस्वरूप जी ब्रहमचारी के सुझाव पर भूमिगत दीर्घा (अण्डर ग्राउण्ड) में महाभारतकालीन 16 चल झांकियां बनायी गयी, जो दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केन्द्र है।

श्री जयराम विद्यापीठ को ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत 1977 में करवाया गया, जिसके 15 विशिष्ठ व्यक्ति संरक्षक तथा 24 मनोनीत ट्रस्टी सदस्य हैं। संस्था को कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से सम्बद्ध (एसोसिएट) करवाकर 1977-78 में ही -शास्त्री तक का प्रथम शिक्षा सत्र आरम्भ किया गया। विद्यापीठ में छात्रों को शिक्षा, पुस्तकें, भोजन व आवास आदि की नि:शुल्क व उत्तम व्यवस्था हैं इसके अतिरिक्त प्रत्येक छात्र को मासिक छात्रवृत्ति भी दी जाती है। अन्नक्षेत्र में साधु-सन्तों को प्रतिदिन मुफ्त भोजन वितरण किया जाता है।

विद्यापीठ के मुख्य आकर्षण

  • अदभुत विश्वदुर्लभ स्फटिकमणि निर्मित शिव दर्शन।

  • महाभारतकालीन चल झांकिया।

  • आधुनिक सुविधाओं से युक्त यात्री निवास।

  • भीष्मपितामह तथा दानवीर कर्ण की विशाल मूर्तियों वाले फव्वारे।

  • दशावतारों सप्तर्षियों तथा नवदुर्गाओं के मन्दिर।

  • वेदमन्त्रों की ध्वनि तथा होम सुगन्ध।

  • स्वच्छ वतावरण, सुन्दर उद्यान तथा ब्रहमसरोवर का मनोहारी दृश्य।

विद्यापीठ की विशिष्ट सेवाएं

  • श्री देवेन्द्र स्वरूप् ब्रहमचारी जी की प्ररेणा से महामहिम राज्यपाल, हरियाणा सरकार, कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड तथा धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से मिलकर प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर पर गीता जयन्ती तथा सांस्कृतिक मेलों का आयोजन

  • विश्वप्रसिद्ध सन्तों के प्रवचनों तथा संगीतमयी कथाओं द्वारा धर्मप्रचार तथा राष्ट्रीय चरित्र निर्माण।

  • विद्यालयों में गीता प्रचार, मुफ्त गीता वितरण, गीता प्रतियोगिताएं तथा गीता सेमीनारों का आयोजन।

  • वेद तथा संस्कृत की शास्त्री तक नि:शुल्क शिक्षा।

  • गरीब कन्याओं के सामूहिक विवाहों का आयोजन

  • साधु-सन्तों में प्रतिदिन मुफ्त भोजन वितरण (भण्डारा)।

  • नि:शुल्क नेत्र चिकित्सा तथा रक्तदान शिविरों का आयोजन।

  • विद्यापीठ में यात्रियों को नि:शुल्क आवास सुविधा।

  • सूर्यग्रहण मेलों पर व विशेष व्यवस्थाएं तथा यात्रीसेवा एवं सुविधाएं प्रदान करना।

  • कष्ट निवारण हेतु शतचण्डी, रूद्राभिषेक, गायत्री जप, महामृत्युंजय आदि अनुष्ठानों की व्यवस्था।

  • गरीबों की सहायता, यात्रीसेवा साधुसन्तों की सेवा, अन्न वितरण धर्मप्रचार, संस्कृत की रक्षा करना ही श्री जयराम विद्यापीठ का उत्तम ध्येय है।

धार्मिक कार्यक्रम

गीताजयन्ती-

कुरूक्षेत्र और गीता दोनों अन्योन्याश्रयी और पर्यावाचक शब्द से लगने लगे है। कुरूक्षेत्र कहते ही गीता और गीता कहते ही कुरूक्षेत्र का स्वत: स्मरण एवं बोध हो जाता है, दोनों की महिमा निराला है, दोनों की पुण्यतम है।

कुरूक्षेत्र ब्रह्मा की उत्तरवेदी है, यहीं पर सृष्टि का सर्जन हुआ, सरस्वती-तट पर अनेक ऋषियों ने यज्ञ तथा तप किये। यहीं पर वेदों का उद्गम हुआ। यहीं अर्जुन के माध्यम से विश्व को गीताज्ञान मिला। सूर्यग्रहण में यहां के तीर्थो का जल अमृतमय हो जाता है। इन सब कारणों से यह धर्मभूमि है- ‘‘मैं कुरूक्षेत्र जाऊगा’’ ऐसा विचार करने पर संकल्प-मात्र से ही मनुष्य पापमुक्त होता है। यहॉ की हवा से उड़ी हुई धूली भी शरीर को लग जाये तो मनुष्य के सब पाप नष्ट हो जाते है। ‘गंगाक्षेत्रे कृतं पापं कुरूक्षेत्रे विनश्यति’’ गंगा पर किये गये पाप कुरूक्षेत्रमें ही आकर धुल पाते है। यहां दिया हुआ दान तेरह दिन तक तेरह गुणा फलता है।

श्रीमद्भगवद्गीता तो भगवान् की अमरवाणी है, जिसका एक-एक पुण्य श्लोक योगक्षेमकारक है। यह उपनिषदों का सार है। ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की त्रिवेणी है। आत्मा की अमरता और शरीर की नश्वरता का ज्ञान देकर इसमें निष्काम कर्म करने की प्रेरणा दी है। यह मनुष्य को जीने की कला ओर मर कर मुक्त होने की विद्या सिखाती है। यह चिंतन का विषय और मनन का शास्त्र है। विश्व में ऐसा कोई ओर ग्रंथ नहीं है। यह निर्विवाद सार्वभौम, कल्याणकारी प्रेरक ग्रंथ है। यह राष्ट्र का गौरव तथा भारत की पहचान है।

गीता के प्रचार-प्रसार हेतु मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में गीता जयन्ती मनायी जाती है। कुरूक्षेत्र में इसके लघु रूप को देखकर ही श्री देवेन्द्रस्वरूप ब्रह्मचारी जी ने 1991 में तत्कालीन हरियाणा के राज्यपाल श्री धनिकलाल मण्डल को गीता जयन्ती बृहद् रूप से मानाने की योजना समझाई कि सरकार, जनता, कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड तथा सभी समाजिक धार्मिक संस्थाएं मिलकर गीता जयन्ती मनाये तो उत्तम रहेगा। महामहिम श्री महावीर प्रसाद जी ने इसे बृहद रूप देकर आगे बढ़ाया। फलस्वरूप आज गीता जयन्ती राज्यस्तर पर ‘‘कुरूक्षेत्र उत्सव’’ के रूप में मनायीजाने लगी। इस अवसर पर श्रीमद्भागवतकथा, निर्धन कन्याओ के सामूहिक विवाह, गीता महायज्ञ, गीता-प्रतियोगिताएं, संगोष्ठियां सांस्कृतिक कार्यक्रम, बच्चों को गोद लेना, आखों के नि:शुल्क कैम्प तथा नगर में विशाल शोभायात्रा, सजावट आदिअनेक कार्यो से सारा कुरूक्षेत्र गीतामय लगता है।

आईये, गीता जयन्ती को भारत का ही नहीं, विश्व का त्यौहार बनाने के लिये मिलकर प्रयास करें।

श्री जयराम विद्यापीठ की भावी योजनाएं :-

लेहार माजरा में पंचायत द्वारा दी गई भूमि का पूर्ण रूप से सदुप्रयोग करने के लिएश्री जयराम विद्यापीठ की कार्यकारिणी ने 29-4-2005 को निम्नलिखित निणर्य लिये:

1- कि लोहार माजरा की जमीन में महिलाओं के लिए बी-एड-, एम-एड, एन-टी-टी-,सी-पी- एड्‌, बी-पी-एड्‌ आदि के कोर्स खोले जाएं, ये कार्य भिन्न-भिन्न चरणों मे किया जाए, पहले चरण में केवल बी-एड, का कालेज खोला जाये। इसके लिए जिन-जिन संस्थाओं को संपर्क करना है, परन्तु संपर्क करक खोलने की प्रक्रिया शुरू की जाय।

2- बी-एड- की शिक्षा देने वाले संस्थान का नाम ‘जयराम महिला कालेज आफ एजुकेशन रिसर्च एण्ड डिवेलपमैंट’’ रखा जाए, ताकि यह संस्था बी-एड्‌ तक सीमित न रह कर शिक्षा में अनुसंधान का कार्य भी करे।

3- सेठ नवरंग राय लोहिया जयराम गर्ल्स कालेज में जो आट्स ब्लाक है और जो बिल्डिंग से बिल्कुल अलग है, इसके अन्दर जाने का रास्ता भी कालेज से अलग है ओर इसमें पर्याप्त कमरे भी उपलब्ध है, उसको बी-एड् का कालेज खोलने के लिए प्रयोग में लाया जाए, यदि कमरों को छोटा-बड़ा करने की आवश्यकता हो तो उसको भी तकनीकी सुझाव लेकर लिया जाए।

इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए हरियाणा सरकार को विधिवत्‌ रूप से पत्र सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रेषित कर दिए गये हैं ओर आशा है कि 2006-2007 में बी-एड्‌ की मान्यता मिल जाएगी।

कुरूक्षेत्र में मैडिकल कालेज के निर्माण की योजना:-

कुरूक्षेत्र के लोगों की बहुत दिनों से ये इच्छा रही है कि कुरूक्षेत्र में मैडिकल कालेज होना चाहिए। इस बारे में बहुत घोषणाएं हो चुकी हैं और बहुत लोगों ने विश्वास दिलाया है, परन्तु अब तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई। राष्ट्रीय मार्ग चंडीगढ़ और दिल्ली के बीच में कोई भी ऐसा अस्पताल नहीं है, जिसमें चिकित्सा की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों। आवश्यकता पड़ने पर एक मरीज को चंडीगढ़ या दिल्ली ले जाना पड़ता है। श्री ब्रह्मस्वचरूप ब्रह्मचारी ने जनता की इस इच्छा ओर आवश्यकता को ध्यान रखते हुए खानपुर कोलियां में एक मैडिकल कालेज और अस्पताल की स्थापना करने का निश्चय लिया है। राष्ट्रीय मार्ग पर कुरूक्षेत्र से 7 किमी- दूर गांव खानपुर कोलियां में मैडिकल कालेज के निर्माण की योजना है। इसके लिए ग्राम पंचायत ने अपनी सिफारिश के साथ सभी सम्बन्धित पत्र उपायुक्त कुरूक्षेत्र को भेज दिए है। इस योजना में लगभग 100 करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान है।
 

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